AddThis code

Thursday, March 23, 2017

नये नेताओं के अलग-अलग विचार-भगतसिंह (1928)

जुलाई, 1928 के ‘किरती’ में छपे इस लेख में भगतसिंह ने सुभाषचन्द्र बोस और जवाहरलाल नेहरू के विचारों की तुलना की है।
असहयोग आन्दोलन की असफलता के बाद जनता में बहुत निराशा और मायूसी फैली। हिन्दू-मुस्लिम झगड़ों ने बचा-खुचा साहस भी खत्म कर डाला। लेकिन देश में जब एक बार जागृति फैल जाए तब देश ज्यादा दिन तक सोया नहीं रह सकता। कुछ ही दिनों बाद जनता बहुत जोश के साथ उठती तथा हमला बोलती है। आज हिन्दुस्तान में फिर जान आ गई है। हिन्दुस्तान फिर जाग रहा है। देखने में तो कोई बड़ा जन-आन्दोलन नजर नहीं आता लेकिन नींव जरूर मजबूत की जा रही है। आधुनिक विचारों के अनेक नए नेता सामने आ रहे हैं। इस बार नौजवान नेता ही देशभक्त लोगों की नजरों में आ रहे हैं। बड़े-बड़े नेता बड़े होने के बावजूद एक तरह से पीछे छोड़े जा रहे हैं। इस समय जो नेता आगे आए हैं वे हैं- बंगाल के पूजनीय श्री सुभाषचन्द्र बोस और माननीय पण्डित श्री जवाहरलाल नेहरू। यही दो नेता हिन्दुस्तान में उभरते नजर आ रहे हैं और युवाओं के आन्दोलनों में विशेष रूप से भाग ले रहे हैं। दोनों ही हिन्दुस्तान की आजादी के कट्टर समर्थक हैं। दोनों ही समझदार और सच्चे देशभक्त हैं। लेकिन फिर भी इनके विचारों में जमीन-आसमान का अन्तर है। एक को भारत की प्राचीन संस्कृति का उपासक कहा जाता है तो दूसरे को पक्का पश्चिम का शिष्य। एक को कोमल हृदय वाला भावुक कहा जाता है और दूसरे को पक्का युगान्तरकारी। हम इस लेख में उनके अलग-अलग विचारों को जनता के समक्ष रखेंगे, ताकि जनता स्वयं उनके अन्तर को समझ सके और स्वयं भी विचार कर सके। लेकिन उन दोनों के विचारों का उल्लेख करने से पूर्व एक और व्यक्ति का उल्लेख करना भी जरूरी है जो इन्हीं स्वतन्त्रता के प्रेमी हैं और युवा आन्दोलनों की एक विशेष शख्सियत हैं। साधू वासवानी चाहे कांग्रेस के बड़े नेताओं की भाँति जाने माने तो नहीं, चाहे देश के राजनीतिक क्षेत्र में उनका कोई विशेष स्थान तो नहीं, तो भी युवाओं पर, जिन्हें कि कल देश की बागडोर संभालनी है, उनका असर है और उनके ही द्वारा शुरू हुआ आन्दोलन ‘भारत युवा संघ’ इस समय युवाओं में विशेष प्रभाव रखता है। उनके विचार बिल्कुल अलग ढंग के हैं। उनके विचार एक ही शब्द में बताए जा सकते हैं — “वापस वेदों की ओर लौट चलो।” (बैक टू वेदस)। यह आवाज सबसे पहले आर्यसमाज ने उठाई थी। इस विचार का आधार इस आस्था में है कि वेदों में परमात्मा ने संसार का सारा ज्ञान उड़ेल दिया है। इससे आगे और अधिक विकास नहीं हो सकता। इसलिए हमारे हिन्दुस्तान ने चौतरफा जो प्रगति कर ली थी उससे आगे न दुनिया बढ़ी है और न बढ़ सकती है। खैर, वासवानी आदि इसी अवस्था को मानते हैं। तभी एक जगह कहते हैं —
“हमारी राजनीति ने अब तक कभी तो मैजिनी और वाल्टेयर को अपना आदर्श मानकर उदाहरण स्थापित किए हैं और या कभी लेनिन और टॉल्स्टाय से सबक सीखा। हालांकि उन्हें ज्ञात होना चाहिए कि उनके पास उनसे कहीं बड़े आदर्श हमारे पुराने ॠषि हैं।” वे इस बात पर यकीन करते हैं कि हमारा देश एक बार तो विकास की अन्तिम सीमा तक जा चुका था और आज हमें आगे कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि पीछे लौटने की जरूरत है।
आप एक कवि हैं। कवित्व आपके विचारों में सभी जगह नजर आता है। साथ ही यह धर्म के बहुत बड़े उपासक हैं। यह'शक्ति’ धर्म चलाना चाहते हैं। यह कहते हैं, “इस समय हमें शक्ति की अत्यन्त आवश्यकता है।” वह ‘शक्ति’ शब्द का अर्थ केवल भारत के लिए इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन उनको इस शब्द से एक प्रकार की देवी का, एक विशेष ईश्वरीय प्राप्ति का विश्वास है। वे एक बहुत भावुक कवि की तरह कहते हैं —
“For in solitude have communicated with her, our admired Bharat Mata, And my aching head has heard voices saying... The day of freedom is not far off.” ..Sometimes indeed a strange feeling visits me and I say to myself – Holy, holy is Hindustan. For still is she under the protection of her mighty Rishis and their beauty is around us, but we behold it not.
अर्थात् एकान्त में भारत की आवाज मैंने सुनी है। मेरे दुखी मन ने कई बार यह आवाज सुनी है कि ‘आजादी का दिन दूर नहीं'...कभी कभी बहुत अजीब विचार मेरे मन में आते हैं और मैं कह उठता हूँ — हमारा हिन्दुस्तान पाक और पवित्र है, क्योंकि पुराने ॠषि उसकी रक्षा कर रहे हैं और उनकी खूबसूरती हिन्दुस्तान के पास है। लेकिन हम उन्हें देख नहीं सकते।
यह कवि का विलाप है कि वह पागलों या दीवानों की तरह कहते रहे हैं — “हमारी माता बड़ी महान है। बहुत शक्तिशाली है। उसे परास्त करने वाला कौन पैदा हुआ है।” इस तरह वे केवल मात्र भावुकता की बातें करते हुए कह जाते हैं — “Our national movement must become a purifying mass movement, if it is to fulfil its destiny without falling into clasaa war one of the dangers of Bolshevism.”
अर्थात् हमें अपने राष्ट्रीय जन आन्दोलन को देश सुधार का आन्दोलन बना देना चाहिए। तभी हम वर्गयुद्ध के बोल्शेविज्म के खतरों से बच सकेंगे। वह इतना कहकर ही कि गरीबों के पास जाओ, गाँवों की ओर जाओ, उनको दवा-दारू मुफ्त दो — समझते हैं कि हमारा कार्यक्रम पूरा हो गया। वे छायावादी कवि हैं। उनकी कविता का कोई विशेष अर्थ तो नहीं निकल सकता, मात्र दिल का उत्साह बढ़ाया जा सकता है। बस पुरातन सभ्यता के शोर के अलावा उनके पास कोई कार्यक्रम नहीं। युवाओं के दिमागों को वे कुछ नया नहीं देते। केवल दिल को भावुकता से ही भरना चाहते हैं। उनका युवाओं में बहुत असर है। और भी पैदा हो रहा है। उनके दकियानूसी और संक्षिप्त-से विचार यही हैं जो कि हमने ऊपर बताए हैं। उनके विचारों का राजनीतिक क्षेत्र में सीधा असर न होने के बावजूद बहुत असर पड़ता है। विशेषकर इस कारण कि नौजवानों,युवाओं को ही कल आगे बढ़ना है और उन्हीं के बीच इन विचारों का प्रचार किया जा रहा है।
अब हम श्री सुभाषचन्द्र बोस और श्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों पर आ रहे हैं। दो-तीन महीनों से आप बहुत-सी कान्फ्रेंसों के अध्यक्ष बनाए गए और आपने अपने-अपने विचार लोगों के सामने रखे। सुभाष बाबू को सरकार तख्तापलट गिरोह का सदस्य समझती है और इसीलिए उन्हें बंगाल अध्यादेश के अन्तर्गत कैद कर रखा था। आप रिहा हुए और गर्म दल के नेता बनाए गए। आप भारत का आदर्श पूर्ण स्वराज्य मानते हैं, और महाराष्ट्र कान्फ्रेंस में अध्यक्षीय भाषण में अपने इसी प्रस्ताव का प्रचार किया।
पण्डित जवाहरलाल नेहरू स्वराज पार्टी के नेता मोतीलाल नेहरू ही के सुपुत्र हैं। बैरिस्टरी पास हैं। आप बहुत विद्वान हैं। आप रूस आदि का दौरा कर आए हैं। आप भी गर्म दल के नेता हैं और मद्रास कान्फ्रेंस में आपके और आपके साथियों के प्रयासों से ही पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव स्वीकृत हो सका था। आपने अमृतसर कान्फ्रेंस के भाषण में भी इसी बात पर जोर दिया। लेकिन फिर भी इन दोनों सज्जनों के विचारों में जमीन-आसमान का अन्तर है। अमृतसर और महाराष्ट्र कान्फ्रेंसों के इन दोनों अध्यक्षों के भाषण पढ़कर ही हमें इनके विचारों का अन्तर स्पष्ट हुआ था। लेकिन बाद में बम्बई के एक भाषण में यह बात स्पष्ट रूप से हमारे सामने आ गई। पण्डित जवाहरलाल नेहरू इस जनसभा की अध्यक्षता कर रहे थे और सुभाषचन्द्र बोस ने भाषण दिया। वह एक बहुत भावुक बंगाली हैं। उन्होंने भाषण आरंभ किया कि हिन्दुस्तान का दुनिया के नाम एक विशेष सन्देश है। वह दुनिया को आध्यात्मिक शिक्षा देगा। खैर, आगे वे दीवाने की तरह कहना आरम्भ कर देते हैं — चांदनी रात में ताजमहल को देखो और जिस दिल की यह सूझ का परिणाम था, उसकी महानता की कल्पना करो। सोचो एक बंगाली उपन्यासकार ने लिखा है कि हममें यह हमारे आँसू ही जमकर पत्थर बन गए हैं। वह भी वापस वेदों की ओर ही लौट चलने का आह्वान करते हैं। आपने अपने पूना वाले भाषण में ‘राष्ट्रवादिता’ के सम्बन्ध में कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीयतावादी, राष्ट्रीयतावाद को एक संकीर्ण दायरे वाली विचारधारा बताते हैं, लेकिन यह भूल है। हिन्दुस्तानी राष्ट्रीयता का विचार ऐसा नहीं है। वह न संकीर्ण है, न निजी स्वार्थ से प्रेरित है और न उत्पीड़नकारी है, क्योंकि इसकी जड़ या मूल तो ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ है अर्थात् सच,कल्याणकारी और सुन्दर।
यह भी वही छायावाद है। कोरी भावुकता है। साथ ही उन्हें भी अपने पुरातन युग पर बहुत विश्वास है। वह प्रत्येक बात में अपने पुरातन युग की महानता देखते हैं। पंचायती राज का ढंग उनके विचार में कोई नया नहीं। ‘पंचायती राज और जनता के राज'वे कहते हैं कि हिन्दुस्तान में बहुत पुराना है। वे तो यहाँ तक कहते हैं कि साम्यवाद भी हिन्दुस्तान के लिए नई चीज नहीं है। खैर, उन्होंने सबसे ज्यादा उस दिन के भाषण में जोर किस बात पर दिया था कि हिन्दुस्तान का दुनिया के लिए एक विशेष सन्देश है। पण्डित जवाहरलाल आदि के विचार इसके बिल्कुल विपरीत हैं। वे कहते हैं —
“जिस देश में जाओ वही समझता है कि उसका दुनिया के लिए एक विशेष सन्देश है। इंग्लैंड दुनिया को संस्कृति सिखाने का ठेकेदार बनता है। मैं तो कोई विशेष बात अपने देश के पास नहीं देखता। सुभाष बाबू को उन बातों पर बहुत यकीन है।” जवाहरलाल कहते हैं —
“Every youth must rebel. Not only in political sphere, but in social, economic and religious spheres also. I have not much use for any man who comes and tells me that such and such thing is said in Koran, Every thing unreasonable must be discarded even if they find authority for in the Vedas and Koran.”
[यानी] “प्रत्येक नौजवान को विद्रोह करना चाहिए। राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक क्षेत्र में भी। मुझे ऐसे व्यक्ति की कोई आवश्यकता नहीं जो आकर कहे कि फलाँ बात कुरान में लिखी हुई है। कोई बात जो अपनी समझदारी की परख में सही साबित न हो उसे चाहे वेद और कुरान में कितना ही अच्छा क्यों न कहा गया हो, नहीं माननी चाहिए।”
यह एक युगान्तरकारी के विचार हैं और सुभाष के एक राज-परिवर्तनकारी के विचार हैं। एक के विचार में हमारी पुरानी चीजें बहुत अच्छी हैं और दूसरे के विचार में उनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया जाना चाहिए। एक को भावुक कहा जाता है और एक को युगान्तरकारी और विद्रोही। पण्डित जी एक स्थान पर कहते हैं —
“To those who still fondly cherish old ideas and are striving to bring back the conditions which prevailed in Arabia 1300 years ago or in the Vedic age in India. I say, that it is inconceivable that you can bring back the hoary past. The world of reality will not retrace its steps, the world of imaginations may remain stationary.”
वे कहते हैं कि जो अब भी कुरान के जमाने के अर्थात् 1300 बरस पीछे के अरब की स्थितियाँ पैदा करना चाहते हैं, जो पीछे वेदों के जमाने की ओर देख रहे हैं उनसे मेरा यह कहना है कि यह तो सोचा भी नहीं जा सकता कि वह युग वापस लौट आएगा, वास्तविक दुनिया पीछे नहीं लौट सकती, काल्पनिक दुनिया को चाहे कुछ दिन यहीं स्थिर रखो। और इसीलिए वे विद्रोह की आवश्यकता महसूस करते हैं।
सुभाष बाबू पूर्ण स्वराज के समर्थन में हैं क्योंकि वे कहते हैं कि अंग्रेज पश्चिम के वासी हैं। हम पूर्व के। पण्डित जी कहते हैं,हमें अपना राज कायम करके सारी सामाजिक व्यवस्था बदलनी चाहिए। उसके लिए पूरी-पूरी स्वतन्त्रता प्राप्त करने की आवश्यकता है।
सुभाष बाबू मजदूरों से सहानुभूति रखते हैं और उनकी स्थिति सुधारना चाहते हैं। पण्डित जी एक क्रांति करके सारी व्यवस्था ही बदल देना चाहते हैं। सुभाष भावुक हैं — दिल के लिए। नौजवानों को बहुत कुछ दे रहे हैं, पर मात्र दिल के लिए। दूसरा युगान्तरकारी है जो कि दिल के साथ-साथ दिमाग को भी बहुत कुछ दे रहा है।
“They should aim at Swaraj for the masses based on socialism. That was a revolutionary change with they could not bring out without revolutionary methods...Mere reform or gradual repairing of the existing machinery could not achieve the real proper Swaraj for the General Masses.” अर्थात् हमारा समाजवादी सिद्धान्तों के अनुसार पूर्ण स्वराज होना चाहिए, जो कि युगान्तरकारी तरीकों के बिना प्राप्त नहीं हो सकता। केवल सुधार और मौजूदा सरकार की मशीनरी की धीमी-धीमी की गई मरम्मत जनता के लिए वास्तविक स्वराज्य नहीं ला सकती।
यह उनके विचारों का ठीक-ठाक अक्स है। सुभाष बाबू राष्ट्रीय राजनीति की ओर उतने समय तक ही ध्यान देना आवश्यक समझते हैं जितने समय तक दुनिया की राजनीति में हिन्दुस्तान की रक्षा और विकास का सवाल है। परन्तु पण्डित जी राष्ट्रीयता के संकीर्ण दायरों से निकलकर खुले मैदान में आ गए हैं।
अब सवाल यह है कि हमारे सामने दोनों विचार आ गए हैं। हमें किस ओर झुकना चाहिए। एक पंजाबी समाचार पत्र ने सुभाष की तारीफ के पुल बाँधकर पण्डित जी आदि के बारे में कहा था कि ऐसे विद्रोही पत्थरों से सिर मार-मारकर मर जाते हैं। ध्यान रखना चाहिए कि पंजाब पहले ही बहुत भावुक प्रान्त है। लोग जल्द ही जोश में आ जाते हैं और जल्द ही झाग की तरह बैठ जाते हैं।
सुभाष आज शायद दिल को कुछ भोजन देने के अलावा कोई दूसरी मानसिक खुराक नहीं दे रहे हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि पंजाब के नौजवानों को इन युगान्तरकारी विचारों को खूब सोच-विचार कर पक्का कर लेना चाहिए। इस समय पंजाब को मानसिक भोजन की सख्त जरूरत है और यह पण्डित जवाहरलाल नेहरू से ही मिल सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके अन्धे पैरोकार बन जाना चाहिए। लेकिन जहाँ तक विचारों का सम्बन्ध है, वहाँ तक इस समय पंजाबी नौजवानों को उनके साथ लगना चाहिए, ताकि वे इन्कलाब के वास्तविक अर्थ, हिन्दुस्तान के इन्कलाब की आवश्यकता, दुनिया में इन्कलाब का स्थान क्या है,आदि के बारे में जान सकें। सोच-विचार के साथ नौजवान अपने विचारों को स्थिर करें ताकि निराशा, मायूसी और पराजय के समय में भी भटकाव के शिकार न हों और अकेले खड़े होकर दुनिया से मुकाबले में डटे रह सकें। इसी तरह जनता इन्कलाब के ध्येय को पूरा कर सकती है।

Date Written: July 1928
Author: Bhagat Singh
Title: Different views of new leaders (Naye netaon ke alag alag vicar)
First Published: in Kirti July 1928.
Reference- https://www.marxists.org/hindi/bhagat-singh/1928/naye-netaon.htm

Saturday, March 18, 2017

ट्रॅफिक पोलिसांनी चक्क माझे License आणि पावतीसाठीचे पैसे परत दिले- एक असाही अनुभव

शहाण्याने कोर्टाचीे  पायरी चढू नये म्हणतात तसा मी कोर्ट, पोलीस आणि दवाखाना यांच्यापासून चार हात दूरच असतो.

नियमित व्यायाम केला तर दवाखान्याची गरज नाही, वाहतुकीचे नियम पाळले ट्रॅफिक पोलिसांशी संबंध येत नाही. पण कधी कधी काही प्रसंग टाळता येत नाहीत.


पुण्यात कुठल्या कार्यक्रमाला जायचे म्हटले  तर बऱ्याचदा पार्किंग शोधायलाच 10-15 मिनिट जातात पण हे जर नाही केले तर नो पार्किंग मधून कधी गाडी उचलून नेतील याचा भरोसा नाही म्हणून तेवढी काळजी घ्यावीच लागते.

असाच काही दिवसांपूर्वी शिवाजीनगर चौकातून संचेती हॉस्पिटल रस्त्याकडे जात होतो गाडी डावीकडे वळवली तेव्हा ट्रॅफिक पोलिसांनी अडवले. मनात म्हटल कारण काय? डोक्यावर हेल्मेट होते, हेड लाईट, नंबर प्लेट सर्व तर बरोबर होते मग काय कारण असेल बरं? त्यांनी माझ्याकडून चालक परवाना (Driving Licence) घेतला आणि २०० रु ची पावती करायला सांगितले. म्हटल ‘काका चुकल काय पण माझ?’ तेव्हा कळले कि दुभाजकाच्या डाव्या बाजूने जाण्याऐवजी मी उजव्या बाजूने गाडी घेतली होती जेथून डावीकडे वळायला परवानगी नव्हती. त्यांना म्हटले "बोर्ड तरी लावायला हवा होता याबद्दल" , मग म्हटले "जाऊ द्या ना काका एवढ्या वेळेस" पण २०० रु ची पावती करा आणि मगच licence देतो अस त्यांनी बजावलेे. काय करणार?


खिशात हात घातला तर ६० रु निघाले. Debit Card होते पण नोटबंदीचा काळ होता. ६० रु दिले आणि म्हटले जाऊ द्या एवढेच आहेत पण तरीही त्यांनी licence काही दिले नाही. शेवटी sack मध्ये काही आहे का शोधू लागलो त्यात माझेच गांधीजीचे एक पुस्तक होते कुणाला तरी कुरिअर ने पाठवायचे होते ते दिले आणि पुस्तकाची माहिती दिली. त्यानंतर काय झाले काय माहित पण त्यांनी licence आणि ६० रु दोन्ही परत दिले. पुस्तक त्यांच्याकडेच ठेवले आणि जा म्हणाले. "पुस्तक कसे वाटले त्याचा अभिप्राय नक्की द्या असे 2-3दा त्यांना सांगून मी निघालो. "गांधी मजबुरी नाही मजबुती का नाम" याचा प्रत्यय आला.पण मन अस्वस्थ होते "का सोडले बरं?"

दुसर्या दिवशी पुन्हा माहिती घेऊ म्हणून तेथे गेलो तर ज्यांना पुस्तक दिले ते पोलीस तिथे नव्हते दुसरे होते त्यांच्याकडून दंड कसा असतो आणि इतर नियम काय असतात या गोष्टींबाबातीत माहिती घेऊ लागलो. "पोलीस काहीतरी कारण काढून पावती न करता पैसे उकळतात"असा एक समज अनेक लोकांमध्ये आहे याबद्दल विचारले असता त्यांनी सांगितले कि पोलीस कधीच पैसे मागत नाहीत प्रत्यक्ष्य डेमो तुम्हीच बघा त्यानंतर मात्र जे झाले ते आश्चर्यकारक होते

सिग्नल तोडणार्या दोघांची गाडी अडवली आणि मला जवळ बोलवून निरीक्षण करायला सांगितले. दोघांना  २००-२०० रु ची पावती करायला सांगितले. क्रमाने ५० रु आणि नंतर १०० रु देण्याचा प्रयत्न त्यातील एकाने  केला शेवटी पोलिसांनी शेवटपर्यंत नकार दिल्याने बर्याच वेळाने त्याने २०० रु ची पावती केली दुसर्याने तर शेवटपर्यंत दिलेच नाहीत.

   ट्रॅफिक चे नियम व इतर अनेक बाबतीतील सत्य अधिक जाणून घेण्यासाठी मग पुणे शहराचे मुख्य पोलीस निरीक्षक शंकरराव डामसे यांची भेट घेतली.. त्यांना अनेक प्रश्न विचारले पोलिसांच्या समस्या जाणून घेण्याचा प्रयत्न केला. सणवार आदीच्या सुट्टीबाबत विचारले असता ते म्हणाले कि "आम्हाला स्वतःला जरी सण साजरे करता येत नसले तरी लोक जे सण साजरे करतात त्यातच आमचा सन्मान आहे".हेल्मेट न घातल्यामुळे आज काल कुणाला पकडत नाही याबाबत त्यांना विचारले असता त्यांनी सांगितले कि पोलीसही शेवटी माणूसच आहे.समोरच्या ३० गाड्यांपैकी ३-४ जन च हेल्मेट घालत असतील तर पोलीस कुणा-कुणाला पकडणार ?


या चर्चेतून हा निष्कर्ष निघाला कि पोलीस तर आपल्या संरक्षणासाठी त्यांचे सणवार, घर परिवार आदी सोडून रात्रंदिवस झटत असतात आपण त्याची जाण ठेवायला हवी.त्यांच्या असण्यामुळेच आपण वेळेवर सुरक्षितपणे आपल्या ठिकाणी जाऊ शकतो 

, अपघात होत नाहीत बऱ्याच गोष्टी सुलभ होतात हे लक्षात घ्यायला हवे


याच बाबतचे काही अनुभव मला ही आले


वर्षभरापूर्वी अॉफिसमधुन घरी येत होतो. 


पुणे मुंबई हायवेवर पिंपरी वरुन खडकीकडे जात असताना आमच्या कारच्या(company cab) थोडस पुढे भरदाव जाणारी एक बाईक स्लिप झाली बाईकवरील युवकाचे डोके दुभाजकाला जोरात धडकले ,बर्याच लांबपर्यंत तो गाडीसह फरपटत गेला आणि पडला. त्याच्या शेजारुन जाणार्या छोट्या टेंपोचालकाने प्रसंगवधान राखुन ईशारा करुन मागुन येणार्या गाड्यांना थांबवले 1-2 जणाांनी आपली गाडी थांबवुन त्या तरुणाला ऊचलुन बाजुला नेले त्याला किरकोळ मुका मार लागला होता हेल्मेटमुळे डोक्याला कुठलीही दुखापत झाली नव्हती हेल्मेट नसते तर काय झाले असते कुणास ठाऊक??


दोन वर्षांपूर्वी (नोव्हेंबर 2014)माझ्या Cousinचा(आत्येभाऊ)अपघात झाला होता तो पौडरोड सिग्नलवर थांबला होता आणि समोरुन येणार्या एका भरदाव कारने त्याला ऊडवले व कारचालक फरार झाली जवळ असणार्या काही लोकांनी त्याला हॉस्पिटलमध्ये नेले डोक्याला गंभीर जखम झाली होती 3दिवस तो ICU मध्ये होता आणि नंतर महिनाभर दवाखान्यातच.यात त्याची काहीही चुकी नव्हती तरीही त्याला हे सर्व सहन करावे लागले.यानंतर त्यानेही सांगितले कि हेल्मेट असते तर एवढी जखम झाली नसती.


असाच माझ्या एका जवळच्या नातेवाईकाचाही शिक्रापुरजवळ अपघात झाला.शिक्रापुरहुन पुण्याकडे कारने येत असताना  एक व्यक्ती अचानक गाडीसमोर आल्याने चालकाने त्या व्यक्तीला वाचवण्यासाठी गाडी दुसरीकडे वळवली तेव्हा ती समोर थांबलेल्या कंटेनरला धडकली आणि थांबली तसे ते डायरेक्ट पुढे ढकलले गेले आणि त्यांच्या डोक्याला आणि हनुवटीला, जबड्याला गंभीर जखमा झाल्या आहेत. ड्राइवरने सीट बेल्ट लावल्यामुळे त्याला जास्त काही झाले नाही.


हेल्मेट किंवा सिट बेल्ट अतिशय महत्वाचे आहेत.वाहतुकीचे नियम आपल्याच चांगल्यासाठी आहेत ते पाळायलाच हवेत. 


एका जवळच्या मित्राला मी हेल्मेटचे महत्व सांगत होतो तर त्याने प्रतिऊत्तरात "नशिबात व्हायचे असेल तर ते कधीही होईल तु हेल्मेट घातल काय किंवा नाही काय ?तरीही वाद प्रतिवाद करुन मी हेल्मेटचे महत्व त्याला पटवून दिलेच.

आपण एवढयाश्या मोबाईलला स्क्रीनगार्ड,कव्हर काय काय लावतो. एका निर्जिव स्क्रीनला एवढ जपतो तो खराब झाला तर दुसरा घेता येतो पण डोके ,आपले शरीर परत मिळेल का? विचार करावा

सर्व मित्रांना विनंती कि हेल्मेट आणि सीट बेल्ट अवश्य वापरावे. सोबतच गाडी चालवताना फोन वापरू नये.


तुम्हाला काही वाटत नसल तरी घरी तुमचे वाट पाहणारे असतात Cousin च्या अपघाताच्या वेळी हे मी स्वत: अनुभवल आहे तर मित्रानो शेवटी एवढेच सांगेन कि नियम पाळा सुरक्षित रहा. ज्या भ्रष्टाचाराच्या नावाने तुम्ही पोलीस किंवा सरकारी कर्मचाऱ्यांच्या नावाने खडे फोडता त्या भ्रष्टचाराला मूळ कारण तुम्हीच आहात 


So Be The Change you wish see in the World


जो बदल तुम्हाला देशात किंवा जगात घडवायचा आहे त्याची सुरुवात तर स्वतःपासूनच करावी लागेल ना


कोई भी देश  परफेक्ट नही होता उसे परफेक्ट बनाना पडता है आणि  त्याला तसं बनवण्यासाठी प्रयत्न करूया.


संकेत मुनोत

8087446346


Monday, March 13, 2017

One In a Lifetime Experience at Sassoon Hospital..

Distributing blankets from 9:00 pm to 4:00am in Hadpsar ,khadki, pune station , bhavani peth, swargate ; 'Changle vichaar' team was about to return . suddenly there was a call from Amol ." Please come at sasoon hospital. A blind boy's leg is fractured. We have contributed few rupees near municipality." The call ended...
I , Nilesh and harshal bhaiya took our bikes ..we were about to return. But there was a call from samta didi ,"The case is serious..come as soon as possible." My heart came in my mouth..a cycle started in my mind. What were we going to do and what happened ! Someone under the wheel ? Or something else must have happened ? One heart was saying that someone may have helped but the other heart was under tension. 
As we entered sasoon , there was a sense of relief.
Actually what had happened was..
Changle vichar team along with samta didi was wandering at the municipal corporation road, finding someone needy for Blanket donation. When they were returning they saw 3 youngsters near the divider .The car went  forward...but  some doubt was disturbing samta didi , may be the trio was blind .She took a U turn.They were actually blind  and trying to hire an auto or a car.Many vehicles passed but not even one person thought about them? No one asked them what happened? We punekars have become so inhumane ?
One of the three named laxmikant's right leg got caught in a pit and the other two were trying to put it right..As soon as the team realised this, chaitanya took him to the sasoon hospital via auto.( His friends were advising us to take him to mangeshkar hospital.)The auto driver didn't charge .We urged him to but he expressed , "As a human this is my duty "
We had a common outlook that government hospitals don't act fast.But we experienced something different.
Doctors showed enthusiasm and within seconds he removed his leg dislocation. Everyone was tensed and eager to see the x-ray reports .The reports were normal . We took a deep breath. Thereafter we took him to ambedkar hostel and departed him.
Now we have 4 friends with special vision . Before some time got call from Amol and Vidyadhar  that laxmikant was feeling well.He was continuously thanking us. As he was cured free, he was telling us to accept money from him.I was touched seeing his honesty.I had tears in my eyes.
The fat guy sitting to the right is laxmikant parab.
Only because of Samta dii,amol , chaitanya ,supriya (changle vichar team) and laxmikant's friends' timely decisions , his leg was saved from being fractured .
I had a different experience of the Auto driver , government hospital , their workers .I realized that if we take a good step we meet many taking such good steps..
Also while we were donating blankets we experienced something good.
Nilesh commented 'There are some rich people whose wants never end .But there are people who are satisfied with their small comforts and refuse to accept any type of donations. Instead they also try to help others.There was a old man sleeping under bhide bridge near a small temple .(He had a worn out blanket )He refused our Blanket.We told him that he can use it for sitting but he said that he already has one.In such intense cold, beneath clear sky ,sitting on a small bench actually preached the theory of life....
Sanket Munot
Whatsapp number- 8087446346
Translation- Manali Kasawa
#Changle vichar team
#Blanketdonationdrive
#happyexperience

Saturday, February 25, 2017

डिजिटल होताना किंवा online व्यवहार करताना सावध रहा, पैसे दुसऱ्याच्या खात्यात जमा होऊ शकतात

डिजिटल होताना किंवा online व्यवहार करताना काळजी घ्या या संदर्भात काही दिवसांपूर्वी आलेला एक अनुभव.

एक महिन्यांपूर्वी OLX वरून घरातील एक जुने कपाट विकले होते परवा ज्याने घेतले त्याचा पुन्हा फोन आला मी एका  कार्यक्रमात असल्यामुळे फोन उचलला नाही मला वाटले आता परत घेऊन जा वगैरे म्हणतो काय?
पण घडले दुसरेच
त्याचा मेसेज आला होता की त्याने चुकून 1080 रु माझ्या अकाउंट वर transfer केले म्हणून खूप काळजीत होता पैसे परत मिळतील का नाही या विवंचनेत कारण आम्ही दोघेही एकमेकांना नीट ओळखत नव्हतो परत  मी म्हटले ''नाही आले माझ्या खात्यात तुझे पैसे" तर काय करणार असे अनेक प्रश्न त्याच्या मनांत होते असे त्याने पैसे मिळाल्यांनतर सांगितले
त्याचे ते पैसे परत पाठवले माझी आणि त्याची ओळख फक्त कपाट देण्यापूरती होती त्यामुळे त्याने माझे नाव payee मधून काढून टाकायला हवे होते पण तसे न केल्यामुळे आणि पुढच्या transfer च्या वेळी चुकून इतर कुणाच्या नावाऐवजी payee मध्ये माझे नाव त्याने निवडल्यामुळे मलाच ते पैसे  transfer झाले.असो मी त्याला ते पैसे परत केले पण असा प्रत्येक जण पैसे परत करेलच असे नाही त्यामुळे online व्यवहार करताना खालील काळजी घ्या. त्यसंबंधी काही मुद्दे
 मी काही त्यातील तज्ञ नाही पण व्यवहार करताना जे थोडेसे वाचले आणि अनुभवले त्यातील काही मुद्दे , कदाचित तुम्हाला हे किंवा यापेक्षा जास्त ही मुद्दे यासंदर्भात माहिती असु शकतील पण जर नसतील तर त्यांच्यासाठी
1.Password- दर काही दिवसांनी बदला, पासवर्ड तयार करताना आपली वैयक्तिक माहिती वापरू नका जसे की काही जण स्वतःचे नाव , जन्मतारीख मोबाईल नंबर पासवर्ड म्हणून वापरतात जे hack करणे सोपे असते
2-OTP - online transaction करतांना जेथे शक्य असेल तेथे OTP compulsory करा म्हणजे पैसे ट्रान्सफर करण्यापूर्वी आपल्या mobile वर code येतो व मगच पैसे ट्रान्सफर होतात
3-अनोळखी links
आपण online असतांना काही साईट्स वर काही जाहिराती येतात आपण त्याला क्लिक करतो आणि काही तरी activate होऊन आपले पैसे जातात किंवा आपल्या मोबाईलवर एखादी अनोळखी लिंक किंवा एमएमएस येतो जो ओपन केला की त्या लिंकमधून मालवेअर आपला pc, लॅपटॉप, मोबाईल हॅक होतो.
4- बँक खात्याबद्दल माहिती विचारणारे फोन आणि ई-मेल?
उत्तर ःकोणतीही बँक आपल्या खात्याबाबत, कार्ड च्या पिन बाबत किंवा ऑनलाइन बॅंकिंगविषयक आपली वैयक्तिक माहिती विचारत नाही. सोबतच काही ई-मेल येतात ज्यात तुम्हाला एवढे एवढे कोटी रुपये बक्षीस लकी विजेता म्हणून मिळणार आहेत आणि त्यासाठी तुम्ही एवढे एवढे पैसे भरा किंवा ही ही माहिती पाठवा असे सांगण्यात येते त्याला ही बळी पडू नका
5-Free Apps-
आपण अनेक फ्री मधील unauthorized applications मोबाईल मध्ये download करत असतो , ज्यात अनेकांना read contacts, messages इ. गोष्टींची  permission ही या applications ला दिली जाते ही permission देऊ नका ही माहिती वापरून तुमचा मोबाईल हॅक होऊ शकतो  ज्यामुळे मोबाईल तुमच्या हातात आणि त्याचा वापर दुसराच कुणीतरी करत असेल.
6-सोशल मीडिया-
facebook, whatsapp, twitter आदी माध्यमांवर वैयक्तिक माहिती share करू नका आणि काही अपरिहार्य कारणासाठी share करायचीच असेल तर त्याची privacy public ऐवजी private करा
7- Payee-
    तुम्ही जर कोणाला online पैसे ट्रान्सफर केले आणि पुन्हा त्याला पैसे पाठवणार नसाल तर  payee चे नाव काढून टाका किंवा payee निवडताना काळजीपूर्वक निवडा
8-Antivirus
Antivirus software सतत update करत राहा कारण रोज नवीन malwares सोडले जातात आणि शक्यतो cyber कॅफे किंवा इतर ठिकाणावरून असले व्यवहार करू नका आणि केलेच तर लॉग आऊट अवश्य करा
धन्यवाद
आपल्याही सूचना यात add  करा 
संकेत मुनोत
8087446346
changalevichar1@gmail.com

ससून हॉस्पिटल मधील थरारक अनुभव

ससून हॉस्पिटलमधील थरारक अनुभव
काल रात्री 09.00 ते पहाटे 4.00पर्यंत पुण्यातील हडपसर,खडकी,पुणे स्टेशन,भवानी पेठ, स्वारगेट अश्या वेगवेगळ्या ठिकाणी जाऊन गरजू शोधून (Blanket donation )गोधडी वाटप केल्यावर पुणे रेल्वे स्टेशनवरून 'चांगले विचार'समूहाची एक टीम घरी निघतच होती कि तेवढयातअमोलचा फोन आला
ससून हॉस्पिटलमध्ये या, "एका अंध मुलाचा पाय fracture झाला आहे महानगरपालिकेजवळ आम्ही थोडे पैसे contribution करून दिले आहेत" फोन कट झाला

स्टेशनच्या पार्किंगवरून गाडी काढली, मी निलेश आणि हर्षलभैया निघतच होतो की पुन्हा समतादिदींचा फोन आला "सिरीयस केस झाली ए लवकर ये"
मनात थोडेसे धस्स झाले म्हटलं काय करायला आलतो आणि काय झाले मनात चक्र सुरु झाले रात्री अचानक कुणी गाडीच्यामध्ये तर आल नसेल ना?  किंवा इतर काही झाले तर नसेल ना?एक मन हेही सांगत होते कि त्यांनी कुणाला मदतही केली असेल पण तरीही एक मन अस्वस्थ होते.
ससूनमध्ये गेलो तेव्हा थोडासा दिलासा मिळाला
तर प्रकरण असे झाले होते
चांगले विचार समूहाची जी एक टीम समता दिदींच्या गाडीत महानगरपालिका रस्त्याजवळ कोणी गरजू दिसतंय का ते पाहण्यासाठी गेली होती तेथून वळताना त्यांना 3 तरुण दुभाजकाजवळ तिथे अस्वस्थ दिसले गाडी बरीचशी पुढे गेल्यावर समतादीदीच्या मनात थोडी शंका आली की ती मुले अंध असावीत म्हणून आणि तिने U turn घेतला.
तर खरच ते तिघेही अंध तरुण होते आणि गाडी किंवा रिक्षा थांबवण्याचा प्रयत्न करत होते पण तिघांनाही दिसत नसल्यामुळे त्यांना रिक्षा वगैरे काही थांबवता आली नाही आणि इतर काही साधनही  मिळाले नाही.अनेक गाड्या त्यांच्या जवळून गेल्या कुणालाच काही कसे वाटले नाही? का कुणी त्यांची साधी विचारपूसही केली नाही किती कठोर हृदयी झालो आहोत आपण पुणेकर?
त्यातील लक्ष्मीकांत या तरुणाचा रस्ता ओलांडताना खड्डा दिसत नसल्यामुळे त्यात उजवा पाय जाऊन शरीराचे पूर्ण वजन त्यावर पडून तो पाय वाकडा झाला होता तर इतर दोघे जण तो पाय नीट करण्याचा प्रयत्न करत होते.टीमला ते समजताच चैतन्य त्यांना रिक्षात बसवून ससून मध्ये घेऊन गेला (त्याचे मित्र त्याला मंगेशकर हॉस्पिटल मध्ये घेऊन जाण्यास सांगत होते)तिथे गेल्यावरही रिक्षावाल्या काकांनी भाडे घेतले नाही त्यांना पैश्याचा आग्रह केला असता 'माझेही माणूस म्हणून पण काहीतरी कर्तव्य आहे' असे ते म्हणाले.
सरकारी हॉस्पिटल म्हणजे लवकर कुणी बघणार नाही असे आम्हाला वाटले होते पण अनुभव वेगळाच आला.
डॉक्टरांनी तत्परता दाखवलीे आणि काही सेकंदातच त्याच्या पायाचे dislocation काढले(हाड सरळ केले) X ray चे reports येऊसतर सर्वांना काळजी होती की आता काय होईल पण Xray मध्ये सर्व रिपोर्ट्स नॉर्मल आले आणि आमचा जीव भांड्यात पडला नंतर तेथून त्याला आंबेडकर वसतिगृहात घेऊन गेलो आणि निरोप देऊन घरी आलो.
आता आंम्हाला दिव्यदृष्टी असलेले 4 नवीन मित्र मिळाले आहेत काही वेळापूर्वीच त्यांच्यातील अमोल आणि विद्याधर यांचा फोन येऊन गेला लक्ष्मीकांतला बरे वाटत असल्याचे त्यांनी सांगितले.वारंवार आभार मनात होता.सोबतच ससूनमध्ये फ्री उपचार झाल्याने  पैसे परत घेऊन जा म्हणूनही तो सांगत होता त्याची प्रामाणिकता पाहून डोळ्यात पाणी आले.
फोटोत डाव्या बाजूला बसलेला जाड तरुण आपण बघताय तो विद्यार्थी म्हणजे लक्ष्मीकांत परब.

समतादीदी, अमोल, चैतन्य , सुप्रिया (चांगले विचार टीम) आणि लक्ष्मीकांतच्या मित्रांच्या समयसुचकतेमुळे त्याचा पाय fracture होण्यापासून वाचला.

रिक्षाचालक, सरकारी हॉस्पिटल,  तेथिल कर्मचारी या सर्वांबाबतचा हा एकदम वेगळाच अनुभव होता एवढे समजले कि तुम्ही जर एक चांगले पाऊल उचलले तर अशी चांगली पाऊले उचलणारे अनेक जण तुम्हाला भेटतात

सोबतच गोधडी वाटप करतानाही असाच एक सुखद अनुभव आला
काही श्रीमंत लोकांच्या गरजा कधीच संपत नाहीत  पण काहीजण असे भेटतात की  ते गरजेपुरते असलं तरीही इतरांना देऊन नंतर स्वतः त्याचा उपभोग घेतात जास्तीची अपेक्षा करत नाहीत तर कोणी जास्तीच देऊ केलं तरीही नम्रपणे नकारही  देतात. 
भिडे पुलाजवळील नदीपात्रातील रस्त्यावरील  एका पुलाखाली छोट्या मंदीर जवळील बाकड्यावर झोपलेल्या एका माणसाने (त्याच्याकडे  अंगावर एकच घोगंडी होती  पण खराब वाटत होती) आम्ही देऊ केलेली  धोगंडी  चक्क  गरज  नाही  म्हणून नम्रपणे नाकारली. मग आम्ही त्याला अंथरायला तरी होईल ही गोधडी म्हणून विचारले पण त्यावरही  त्याने  माझ्याकडे  आहे  अंथरायला असे सांगून तीही नाकारली. असा हा कुडकुडत्या  थंडीत, खुल्या आकाशाखाली, छोट्याश्या  बाकड्यावर,   उघड्या अंगावर घोगंडी  घेऊन  तो माणूस  आम्हालाच जगण्याचं  तत्वज्ञान  सांगुन  गेला.

संकेत मुनोत
Whatsapp number -8087446346
चांगले विचार युवा समूह
#चांगलेविचारसमूह  #Blanketdonationdrive #सुखदअनुभव

Saturday, January 21, 2017

ग्रेट भेट विथ कलिंदीताई

ग्रेट भेट विथ कलिंदीताई
एवढी प्रेरणादायी व्यक्ती आपल्या जवळपास आहे आणि आपल्याला त्यांच्याबद्दल काहीच माहित नाही किती आश्चर्य नव्हे?
खूप आश्चर्य वाटले जेव्हा मी कलिंदीताई बद्दल google वर शोधले पण  एवढया महान व्यक्तीबद्दल मला जास्त काहीच  सापडले  नाही
वर्तमानपत्रात रोज भलत्याच लोकांची नाव वाचायला मिळतात आणि ही निस्वार्थपणे कार्य करणारी समाजोपयोगी विद्वान माणसं मात्र अनोळखीच राहतात !!!
Women are not equal to men; they are superior in many ways, and in most ways that will count in the future. It is not just a matter of culture or upbringing. It is a matter of chromosomes, genes, hormones, and nerve circuits.
अस एका biology प्रोफेसरने लिहून ठेवलय ते खोटं नव्हे अस त्यांना भेटल्यावर पुन्हा एकदा सिद्ध झाले असे वाटले

बरीच चौकशी केल्यावर मग सुगन बरंठ काकांना फोन लावला आणि माहिती घेतली तेव्हा कलिंदीताई नावाचे ते विशाल व्यक्तिमत्व माझ्यासमोर उभे राहिले

इंदौर ला तुम्ही गेलात तर तेथे सरवटे बस स्टँड अतिशय प्रसिद्ध आहे. ते कालिंदी ताई च्या वडिलांच्या नावाने उभारण्यात आले आहे. त्यांचे वडील व्ही. व्ही. सरवटे हे स्वातंत्र्य सेनानी, शिक्षण क्षेत्रातील क्रांतिकारक, गांधीजींचे अनन्य सैनिक होते. इंदौर ला बालग्राम नावाची संस्था त्यांनी स्थापन केली ,जी आजही चालु आहे. त्यांना तात्या म्हणूनच सगळे ओळखतात .
त्यामुळे कालिंदी ताईंना लहानपणा पासूनच तुकडोजी महाराजांच्या शब्दात
सांगायचे तर 'राष्ट्र धर्माचे बाळकडू' मिळालेले आहे. त्यांचे वडील मध्य भारत सरकार मध्ये मंत्री होते.
कालिंदी ताई सरवटे या एम. एस .डब्ल्यू. आहेत, 1960 मध्ये त्या विनोबाजीं कड़े आल्या . वय 85 वर्षे आहे. ही त्यांची भौतिक ओळख झाली.

कार्यकर्ता म्हणून ओळख म्हणायची तर त्या विनोबा सोबत भूदान यात्रेत 10 वर्षे राहिल्यात.
भूदान पदयात्रेतच 1964 ते 1996 पर्यन्त विनोबांच्या भाषणाचे संकलन ही त्यांनी केले, जे आज आपणास मिळते तें खरे तर कुसुमताई देशपांडे आणि कालिंदी ताई यांचीच कृपा होय. कारण बाबा तर फक्त बोलत.

1969 साली बाबांनी क्षेत्र संन्यास घेतल्या पासून त्या  ब्रह्म विद्या मंदीर, पवनार येथेच राहिल्या.

भगिनींना ही ब्रह्म विद्येची उपासना करता यावी हा
खरा वेद विचार, बाबांनी
ब्रह्म विद्या मंदीर रूपाने प्रत्यक्षात उतरविला.
त्या भगिनी मिळून जे अप्रतिम वैचारिक मासिक चालवितात त्याचे नांव 'मैत्री'.हे मासिक म्हणजे गांधी विचारांचे नवनीत होय. कालिंदी ताई त्या मैत्री मासिकाच्या 32 वर्षे संपादक होत्या.
विनोबा विचारमृत जे आज आपणास उपलब्ध आहे, 20 खंडात त्याच्या ही त्या एक
संपादक राहिल्या. विनोबांच्या संकलित विचार धनातूनच त्यांनी खलील पुस्तके लिहिली
1.अहिंसा की तलाश.
2. इस्लाम का पैगाम.
3. ज्ञानोबा माऊली.
4. तुका आकाशा एव्हढा.
ही पुस्तके विनोबांच्या नावानेच आहेत.

त्यांनी बाबांच्या विचारातून स्वताच्या शैलीत खालील पुस्तके लिहलीत .
1. ऐसी जीवनाची कळा
2. अभंग जीवन व्रत
3. गीतेतील परीसाच्या संगतीत.
या वरुण तुमच्या लक्षात येईल की त्या अतिशय उत्तम वाचक, उत्तम ग्रहण
शक्ती असलेल्या, चिंतक आणी लेखक ही आहेत.

विनोबा गेल्यावर ही
त्यांनी आम्हा सारख्या अनेक लोकांना विचार संस्कारांनी सिंचीत केले आहे.

भूदान यात्रेतीलकाम हे तर जमिनी वर (ग्रास रूट वर्क) काम झाले. म्हणजे त्यांनी फक्त ज्ञानदानाचे आणी संस्कारांचेच काम केले असे नव्हे तर  कार्यकर्त्याचे काम ही तब्बल 10 वर्षे केलेलं आहे. 

विनोबा सारख्या युगदृष्टा ऋषींचे वचन संकलन करणे हे
काम विद्वानाचे नव्हे तर तत्वज्ञानी माणसाचे आहे.
या करिता विनोबा ही
समजणे जरूरी आहे.
संतांचे वाङमय हेही ताईंचे खास चिंतन, मननाचा विषय. ही ताईंची बाह्य रुपे असली तरी त्या
अतिशय विनम्र, मितभाषी, मृदु भाषी, निरपेक्ष, निर्भय, निर्वैर आणी निरासक्त आहेत. हे मी जवळून अनुभवले आहे.
***
संकेत मुनोत
8087446346
फेसबुक लिंक- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1375184292532618&id=100001231821936
संदर्भ- सुगन बरंठ काका आणि समता मुथ्था

याच सुश्री . कालिंदी ताई बरोबर एक परिसंवाद आयोजित केला आहे
विचार समजून घेण्यासाठी त्यांच्याशी चर्चा करु या.
मित्रांसह आपले स्वागत आहे।
तारीख - 22 /01/17
वेळ     - दुपारी 5 ते  7
स्थान- रावसाहेब पटवर्धन स्कूल, साने गुरुजी स्मारक सिंहगड रोड, पुणे
आपल्या आयुष्या साठी उपयोगी मार्गदर्शन आपल्याला या प्रबोधनातुन मिळणार आहे..
event ची फेसबुक  लिंक-https://www.facebook.com/events/1817495821826168/?ti=cl
संपर्क - समता मुथ्था     
           9766051446
         - निलेश 
            976634975
          - उमेश ठाकुर
            9049042048
        -सतीश लोखंडे
            9096725056

Thursday, November 24, 2016

Great bhet(interaction) with the great #Scientist_Dr_Raghunath_Mashelkar

Great bhet(interaction) with the great #Scientist_Dr_Raghunath_Mashelkar sir. Lucky enough to spend around 30 mins with him.
We discussed various topics, About my book 'Ek Dhairysheel Yoddha Gandhi', work currently doing then what we can do today, relevance of Gandhian thoughts...etc
He told me to translate book in English and make this available online by PDF too so it will reach millions of people easily.
Gandhian Engineering” is a concept enunciated by Mashelkar in a talk he delivered in Australia in April 2008. More recently, in July 2010, it was further refined and redefined as “Gandhian Innovation,” and published in the Harward Business Review as an article, authored jointly by him and C.K. Prahalad. The crux of it is how to generate “more, from less, for more people”.
The galaxy of contributors is as varied as it is distinguished. To mention a few of them: #Sachin_Tendulkar,  #Amitabh_Bacchan, #Amjad_Ali_Khan, #Anil_Kakodkar, #Narayana_Murthy, M.S. #Swaminathan, #Mallika_Sarabhai, #Rahul_Bajaj, , #Sam_Pitroda & #Sunil_Gavaskar.
I am going to meet some of above soon.
We discussed on Gandhian thoughts: “Each of us must be the change we wish to see in this world”; “An eye for an eye makes the whole world blind”; “The future depends on what we do in the present”; “Earth provides enough to satisfy every man's need, but not every man's greed”; and “Truth alone will endure, all the rest will be swept away before the tide of time.”
Valid teachings
More than ever before, Gandhiji's teachings are valid today, when people are trying to find solutions to the rampant greed, widespread violence, and runaway consumptive style of living. Anu Aga, one of India's foremost women achievers, says that while, in the name of retaliation, violence and hatred are being perpetrated today Gandhiji's gospel of non-violence makes immense sense.
It was the unique non-violent movement under his leadership that earned for India freedom from the colonial rule. In spearheading the campaign against the alien rule, Gandhiji adopted the innovative techniques of civil disobedience and social transformation, which had several exemplary features.
The Gandhian technique of mobilising people has been successfully employed by many oppressed societies around the world under the leadership of people like Martin Luther King in the United States, Nelson Mandela in South Africa, and now Aung Saan Sun Kyi in Myanmar, which is an eloquent testimony to the continuing relevance of Mahatma Gandhi.
In India, economic development has been mostly confined to the urban conglomerates. In the process, the rural India that comprises 700 million people has been given short shrift. Gandhiji's philosophy of inclusive growth is fundamental to the building of a resurgent rural India. He believed in “production by the masses” rather than in mass production, a distinctive feature of the industrial revolution. It is surprising, even paradoxical, that these days Gandhian philosophy should find increasing expression through the most modern technology! Now, it is possible to establish small-scale and medium-scale factories in smaller towns and remote corners of the country, thanks to the phenomenal innovations in communication and information technologies. New technologies have brought in widespread and low-cost electronic connectivity that enables instantaneous contact between industrial units and the sellers and consumers of their products. Location and logistics are no more a limitation or constraint for industrial development.
To quote Sam Pitroda, “While the twenty-first century has been defined by globalisation, free markets, privatisation, liberalisation… it has also been marked by violence, extremism, inequity, poverty, and disparity. Amidst all this, if one poses the question of relevance of Gandhiji to our age, one is struck by an astounding need for him for our times. Gandhiji's ideals… and leadership hold an extremely relevant moral and social mirror to our society.” Thus, the Gandhian model and the modern economy seem to be getting closer to each other. True to its title, the book will inspire social scientists, wherever they may be, for all times to come. Gandhiji did not belong to an era, or an age. He belongs to the humanity for eternity.
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1297187910332257&id=100001231821936
(Who is Mashelkar
#Great_Scientist_Padmashree_Dr_Raghunath_Mashelkar sir #President of #Global_Research_Alliance, a network of publicly funded research and development institutes from Asia-Pacific, South Africa, Europe and USA with over 60,000 #scientists. He is the Chairperson of #Indias_National_Innovation_Foundation. He has been appointed as the first Chairperson of Academy of Scientific and Innovative Research (#AcSIR).
visit to know more about Dr. Raghunath Mashelkar http://www.mashelkar.com/
#Great_Bhet